Saturday, August 17, 2019

ज्ञान पाेटली: क्या है जिंदगी

ज्ञान पाेटली: क्या है जिंदगी: क्या है जिंदगी पानी का बुलबुला , या सागर की लहर , मिट्टी का या कांच का घर , क्यों आते हैं इस दुनिया ...

क्या है जिंदगी


क्या है जिंदगी पानी का बुलबुला,
या सागर की लहर, मिट्टी का या कांच का घर,
क्यों आते हैं इस दुनिया में हम, शुरू करने यह जिंदगी,
कोई जरा बता दे मुझे, क्या है जिंदगी, क्या है जिंदगी।
काम है जिंदगी, निष्काम है जिंदगी,
दूसरों के लिए जीने का नाम है जिंदगी,
दूसरों की खुशियों की दवा, अपने जख्मों पे लगाकर,
वतन पर मरने का नाम है जिंदगी।
इसके अलावा भी हो कुछ अगर और,
तो बताओ मुझे, क्या है जिंदगी, क्या है जिंदगी।

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Tuesday, June 25, 2019

आप भूल जाओ हमें


आप भूल जाओ हमें यही गुज़ारिश करते हैं,

आपका कोई डर नहीं पर हम दुनिया से डरते हैं।

दिल सोचकर थक जाता है कि वो कौन सा चेहरा है,जो चुपके हमको चाहता है।

मन ही मन में चाहा मैंने दिल में तस्वीर बनाई,

जहाँ होता है प्यार सच्चा वहाँ जरूर होती है रुसवाई।

जाने कैसा लोगों का मिज़ाज हो गया,

बेवफाई अब तो एक रिवाज़ हो गया,

हँसता नहीं है कोई भी दिल खोलकर यहाँ,

मुस्कुराना हँसने का अंदाज हो गया। 
(जानप्रीत गिल )
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जिंदगी ने हमेशा मुझे ग़म दिए



खुदा की खुदाई को समझा किसी ने,

फिर नादान दुनिया क्यों बनाई खुदा ने

दुखी के दुःख को देखकर हँसते हैं जो लोग,

क्या ख़ुशी भी उन्ही के लिए बनाई खुदा ने,

बेदर्द भरी क्यों है ये सारी दुनिया,
क्या यही रीत सारे जहाँ में चलाई खुदा ने। 


जिंदगी के मोड़ पर दो रास्ते हैं,

मगर पता नहीं कौन सा हमारा है,

खुदा अब तू ही बता मुझे,

कौन सा दरिया और कौन सा किनारा है।

जिंदगी ने हमेशा मुझे ग़म दिए,
ग़मों की सेज हम सजाते चले गए,
जिनको समझती थे थी मैं अपना,
वही ठोकर लगा कर चले गए।
चाहा तो मैंने बहुत कुछ था,
चाहत से मिला कम, अब खुशियों की चाहत थी,
फिर भी मिला गम।
  
(गगन खिप्पल)
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