Thursday, January 31, 2019

जीवन में बड़ी थकान सी है

        
    
       जीवन में बड़ी थकान सी है,
       चक्की में पिसी ज्यों जान सी है।


 1. राह पे बिखरे कंकर मुझको क्यों अपने से दिखते हैं,
     आख़िर ब्रह्मा भाग में उनके धक्के ही क्यों लिखते हैं,
    तिनका तिनका करने की, क्यों ली किसी ने ठान सी है,
जीवन में...

2 .कौन सगा यहाँ सबने ठगा और नोंच नोंच कर खाया है,
     औरों की तो बात बेमानी साथ ना खुद का साया है,
      हवा ये कैसी,थी तो अपनी , लेकिन अब अनजान सी है,
    जीवन में...

3 .कब्रों से जब बात हुई तो, लगा यहाँ कुछ अपने हैं,
      वरना अपनों ने ही तोड़े, जो भी अपने सपने हैं,
     मुर्दे हैं पर साथ हैं लेटे, जैसे कोई पहचान सी है,
    
       जीवन में बड़ी थकान सी है
       चक्की में पिसी ज्यों जान सी है। 

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