Thursday, January 31, 2019

दूरदर्शिता




यह बात उस समय की है जब बीरबल अभी किशोर ही थे। उनके माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका था। उनके देहांत के बाद जो थोड़ा बहुत रूपया बचा था किशोर बीरबल ने उससे पान का ठेला लगा लिया। वो भी बादशाह अकबर के आगरा वाले किले के बिलकुल सामने। एक दिन वो अपने ठेले के पास सुपारी काट रहे थे कि तभी किले की तरफ से खोजा मुनीर दौड़ते-दौड़ते उनके पास आये। उन्होंने आते ही बालक बीरबल से पूछा-क्या आपके पास पाव भर भीगा हुआ चूना है?

बीरबल-महोदय! चूना तो मेरे पास बहुत है। पर आप इतने चूने का क्या करोगे? 

खोजा मुनीर-पिछले १५ साल से मैं ही बादशाह सलामत को पान बनाकर पेश करता रहा हूँ। किन्तु आज जब मैंने उनको पान खिलाया तो उन्होंने तुरंत हुकम दिया-जाओ ! कहीं से पाव भर चूना ले आओ।

बीरबल-अच्छा ये बात है तो फिर आप चूने के साथ एक कफ़न भी लेते जाना।

मुनीर-पर महाराज कफ़न किस लिए?

बीरबल-क्योंकि सज़ा के तौर पर बादशाह यही चूना आपको खिलाने वाले हैं। हो न हो आज अपने बादशाह के पान में चूना ज्यादा लगा दिया है। बादशाह की जीभ कटी होगी तो उसने तुम्हें सबक सिखाने के लिए ये पाँव भर चूना मंगवाया होगा।

खोजा मुनीर-अरे तुम क्या ज्योतिषी हो? जो बादशाह के बारे में इतनी सटीक भविष्य वाणी कर रहे हो?

बीरबल-मैं ज्योतिषी तो नहीं पर दूरदर्शी जरूर हूँ।

खोजा मुनीर-अगर अपने समस्या को भांप लिया है तो इसका समाधान भी बता दो।

बीरबल-बादशाह के पास जाने से पहले तुम एक सेर घी पीकर जाओ। जब बादशाह चूना पीने का हुकम दे तो गटागट पी जाना। घी की चिकनाहट से न तुम्हारी जीभ कटेगी न छाती में जलन होगी। घी के प्रभाव से चूने का दुष्प्रभाव कट जायेगा। और तुम यमराज की सवारी पर चढ़ने से भी बच जाओगे। क्योकि घी की धार चूने को मारेगी और चूने की धार घी को मार देगी। इस प्रकार दोनों धारें आपस में लड़कर मर जाएँगी।
          खोजा मुनीर ने बीरबल के कहे अनुसार ही किया। घी पीकर दरबार पहुंच गया। बादशाह ने मुनीर को चूना पीने के लिए कहा और वो इसे बेधड़क पी गया। घी के प्रभाव से उसे कुछ नहीं हुआ। बादशाह ने उसे इतना चूना पीने के बाद भी जिन्दा रहने के पीछे कारण पूछा तो मुनीर ने पनवाड़ी बालक की घी वाली सारी बात बता दी। बालक बीरबल की दूरदर्शिता से अचंभित हुआ बादशाह उससे मिलने को आतुर हो उठा और उसे दरबार में बुलाकर बहुत सारा इनाम दिया।
           यही दूरदर्शी बालक बीरबल आगे जा कर अकबर के दरबार में नव-रत्नों में एक वज़ीरे-आलम कर दिया गया।
        इसलिए सज्जनों दूरदर्शिता जीवन की बहुत बड़ी सम्पति है। ऐसी दूरदर्शिता जो सिर्फ आहट मात्र से समस्या को पहचान लेती है। और समस्या का वार होने से पहले ही समाधान की ढाल तैयार रखती है। आएँ हम भी ऐसी दूरदर्शिता को प्राप्त कर अपना जीवन सुखमय बनायें।


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