Tuesday, January 29, 2019

याद तुम्हारी



याद तुम्हारी अभी तलक भी बनी हुई है
    
तम्बू सी कहीं सीधी ज़हन में तनी हुई है

1 .
पगले हैं जो कहते कि हर शाम को सुबह ढल जाती  है
    
मेरा ढलता जीवन देखो शाम भी खुद से जल जाती है
    
सूर्य से तो अपनी कब की युगों पुरानी ठनी हुई है
   
याद तुम्हारी..

2.
पूछा मैंने कलम से परसों तू भी क्या रोती है
    
गीला सा सिरहाना करके तन्हा तन्हा सोती है
   
सहम गया जब देखा ये तो दर्द से पूरी सनी हुई है
   
याद तुम्हारी...

3 .
सूनी राहें राही अकेला और मंजिल नहीँ दूर तलक
    
बरसों बीते युग भी पलटे , और मिली एक झलक
   
अब तो सब धुंधलाता जाए , रात अंधेरी घनी हुई है
    
याद तुम्हारी...

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