Friday, February 1, 2019

खानपान की बदलती तस्वीर

 


आज अधिकांश लोग मोटापे की चिंता से ग्रसित पाए जाते है। `ओबेसिटी' नामक पत्रिका में इस अध्ययन का ही सीधा समीकरण पढ़ने को मिलता कि मोटापे का खान-पान के सही व गलत समय से गहरा सम्बन्ध है। वैज्ञानिक फ्रेड ट्युरेक के अनुसार वज़न कम करने के लिए कैलोरी घटाने के साथ-साथ सही समय पर भोजन करना बेहद जरुरी है।
            परन्तु अब सवाल यह उठता है कि हमारे भोजन का प्राइम टाइम क्या है? आखिर किस आधार पर हमारे शरीर की घडी काम करती है? तो इसका जवाब है कि हमारी आंतरिक घडी को प्रभावित करने का मूल घटक रौशनी को कहा गया है। जब सूर्य की रौशनी हमारी आँखों पर पढ़कर हमारे दिमाग में प्रवेश करती है तो शरीर के अंदर आंतरिक रसायनों का स्राव बढ़ जाता है। संस्कृत भाषा में अमाशय को `जठर' कहा गया है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के अनुसार पेट में भोजन पचाने का काम जठर अग्नि करती है ,महर्षि वाग्भट के अनुसार सूर्योदय से लगभग ढाई घंटे तक, दोपहर में और सूर्यास्त से लगभग ४० मिनट पहले यह जठर अग्नि सबसे ज्यादा तीव्र होती है। इसलिए नाश्ता सूर्य उगने से ढाई घंटे के बीच एवं दोपहर का भोजन १ से ३ बजे के बीच ले लेना चाहिए। रात का खाना सूर्य छुपने से पहले करना लाभदायक माना गया है। जिस प्रकार दिया बुझने से पहले तेज़ भड़कता है, ठीक इसी तरह सूर्य डूबने से पहले जठर अग्नि भी भड़कती है।
           दूसरा सूर्य डूबने के बाद मौसम में नमी एवं बैक्टीरिया व सूक्षम जीव भी सक्रिय हो जाते हैं, जो भोजन को खराब कर देते हैं। सूरज ढलने के उपरांत मात्र एक चीज आसानी से पचाई जा सकती है और वो है-दूध।इसलिए आप रात को गर्म दूध ले सकते हैं।
         हम सबने एक बहुप्रचलित लोकोक्ति को सुना है-सुबह का नाश्ता राजा की तरह, दिन का भोजन आम आदमी की तरह और रात का भोजन एक भिखारी की तरह करें। इसलिए कहा जाता है कि दोपहर का खाना सुबह के खाने के खाने का दो तिहाई और रात का भोजन सुबह के खाने का एक तिहाई होना चाहिए। इसलिए यदि कोई गरिष्ठ आपको बेहद पसंद है और आप चाहकर भी उसे न छोड़ पा रहें हों,तो उसे नाश्ते में लें। उस समय वह आसानी से पच जाएगी।
        पर फिर हमारे भोजन ग्रहण करने का सिलसिला उल्टा कैसे हो गया? आजकल तो हमारा नाश्ता सबसे सबसे हल्का होता है! ज्यादातर लोग सुबह केवल चाय/कॉफी /दूध के साथ टोस्ट /बिस्कुट/रस लेते हैं। दरअसल पाश्चात्य जगत के अंधानुकरण में हमने उनकी भोजन शैली को भी अपना लिया। यूरोप जैसे ठंडे देशों में सूर्य कई महीनों तक उदित नहीं होता जिसके कारण लोगों की जठराग्नि मंद रहती है। इसलिए वहां हल्का नाश्ता ही उचित है पर हमारे देश में नहीं।
   
भोजन करने के अन्य सूत्र -

1 . चरक संहिता के अनुसार पेट में भोजन, पानी और हवा का अनुपात १ :१ :१ होना चाहिए। नहीं तो, कम से कम 2:1:1 जरूर रखें। अगर आप पेट को प्रेशर कुकर मानें और उसमें चावल ऊपर तक भर दें तो क्या होगा? वो जल जायेंगे या कच्चे रह जायेंगे। इसलिए पेट  में भोजन उतना ही डालें जितना पच जाए। खाना यदि अच्छे से पचे तो रस बनता है। यही रस फिर रक्त,मांस, मेद, अस्थि,  मज्जा, शुक्र और अंत में ओज यानि ऊर्जा में परिवर्तित होता है। वहीं दूसरी ओर खाना न पचने पर, शुरुआत में गैस, बदहज़मी से व्यक्ति बेचैन रहता है। पर अपच का सिलसिला जारी रहे तो शरीर में 103 तरह के विष बनते हैं, जिसमें सबसे पहले यूरिक एसिड और फिर एल.डी.एल यानि ख़राब cholesteroltriglycerides बनते हैं। कंधे,कमर व घुटनों में दर्द अथवा हाई बी.पी की समस्या शरीर में इन टॉक्सिन्स की ही देन है। वहीं खून में इनकी ज्यादा मात्रा नाड़ी को ब्लॉक करके हार्ट अटैक का कारण तक बन जाता है।

2. भोजन का सेवन खड़े होकर या चलते फिरते न करें। सुखासन (चौकड़ी ) में बैठ कर खाना खाने से खाना जल्दी पच जाता है। खाना शांत मन से चबा-चबा कर खाना चाहिए।

3. भोजन के ठीक एक दम पहले पानी पीने से जठर अग्नि मंद और भोजन के तुरंत बाद पानी पीने से कफ बढ़ता है। इसलिए जरुरत हो तो भोजन के बीच में एक दो घूँट पानी पी सकते हैं।

4. भोजन के बाद 5 मिंट तक वज्रासन  में बैठें एवं 500-700 कदम जरूर टहलें।

5. अच्छा भोजन भी अगर गलत समय पर लिया जाये तो पचता नहीं। तो फिर कब क्या खाना चाहिए-

-दालें,छोले,राजमा आदि सुबह और दोपहर को लेना सही है। इनमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होने के कारण इन्हें रात को लेने से गैस की शिकायत होती है। 

-दही दोपहर में कहानी लाभदायक होती है। आयुर्वेद में इसे रात को खाना निषेध किया गया है। ये रात्रि में कफ बढ़ाती है। शरीर में सूजन वालों के लिए दही हानिकारक है। 

-रात में गर्म दूध कब्ज़ व अनिद्रा से मुक्त करता है। 

-रात में कॉफी पीना नींद के लिए बाधक है भाव ये नींद उड़ा देती है। 

-फल खाने का सही समय सुबह का है। खट्टे फल व इनका जूस पेट में एसिड बनाते है इसलिए इन्हें दोपहर में खाना खाने से 1-2 घंटे पहले लेना चाहिए।सुबह खाली पेट सेब खाने से पेट से टॉक्सिन्स निकलते हैं वहीं रात में सेब भी एसिड बनाता है। नारियल पानी मोटापे से निजात दिलाता है पर इसका सेवन भी खाली पेट नहीं करना चाहिए। 

 
  

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