Saturday, February 2, 2019

आंगन में फूल खिलाती हूँ...



  
आंगन में फूल खिलाती हूँ, सच्चा मार्ग दिखलाती हूँ,
मैं अपनी संतानों पर, आनंद सदा लुटाती हूँ। 

निडर हूँ मैं नादान नहीं, डरना मेरी पहचान नहीं,
स्वाभिमान से जीती हूँ सबला, नहीं अबला मैं कहलाती हूँ। 
आंगन में फूल...

मैं जग जननी जग पालिका, हूँ दुष्टों की संहारिका,
चंडी दुर्गा हूँ कालिका, जन कलयाण को आती हूँ। 
आंगन में फूल...

मैं किसी की मोहताज नहीं, कोई दबी हुई आवाज़ नहीं,
सच कहने में कोई लाज नहीं, हर यत्न से मैं समझाती हूँ 

आंगन में फूल खिलाती हूँ,सच्चा मार्ग दिखलाती हूँ,
मैं अपनी संतानों पर आनंद सदा लुटाती हूँ। 


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