Tuesday, February 5, 2019

लाख गुलाब हों...

लाख गुलाबों 🌹🌹🌹की हो गठड़ी,
और शहद 🍯🍯के झरने हों,
ख़ुश्बू के हों इत्र बिखेरें,
और हुस्न के धरने हों,
पर मेरे 💖मेहबूब 😍😍के आगे,
कर दो खड़े 👸👸जो करने हो,
आदि अंत युगों सदियों में
नहीं कोई दम भरने को 💞

    🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

2 comments:

  1. I don't need roses I need work to eat. A WORKER AT THE STREET.

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  2. Wao ....Nice
    God bless you ...Keep it up

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