Wednesday, February 20, 2019

जब रक्त स्याही बनता है




श्रम की कलम ✍चलती है, रक्त स्याही बनता है,
कोई कर्म वीर 🏹फकीर🙏 जब, इतिहास के पन्ने लिखता है।

खून💗वही है मतलब का, जिसमें💦उबाल होता है,
उबाल इसी से ही तो, हर हल सवाल होता है,
लहरों 💨से टकराने वालों, को ही किनारा😊 मिलता है।
कोई कर्म वीर फकीर जब...

उन्हें रोक सके न 🍃🍂आँधियाँ, चलते हैं जो चाल💫तूफानी,
दरिया🏖भी वो सूख है जाते, जिसमें रहती नहीं🌿रवानी,
श्रम की भूमि पर ही तो, कोई गुलसितां🌹🌺🌻खिलता है।
कोई कर्म वीर फकीर जब...

लक्ष्य🎯को पाने के लिए, सर्वस्व लुटाना🎉पड़ता है,
धर्म पथिक🏃को जीते जी, ही मर जाना पड़ता है,
बीज मिले जब खाक में, वृक्ष तभी कहलाता है।
कोई कर्म वीर फकीर जब... 

श्रम की कलम ✍चलती है, रक्त स्याही बनता है,
कोई कर्म वीर🏹फकीर
🙏जब, इतिहास के पन्ने लिखता है। 

🎯🏹🍂🏃🌹🌺🌻⛳⛳🎯🏹🍂🏃🌹🌺🌻

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