Sunday, February 3, 2019

निंदकों और चापलूसों से बचें




एक बार एक राजा अपने दरबार के विद्वानों के द्वारा अपनी जिज्ञासायों का समाधान करवा रहे थे। उन्होंने विद्वानों को कई तरह के सवाल किये, जिस पर विद्वजन अपनी अपनी राय दे रहे थे। अचानक राजा ने सभी विद्वानों की और देखते हुए कहा-प्रिय विद्वजनों, कृपया आप सब हमारी एक जिज्ञासा का समाधान दें  कि इस संसार में सबसे तेज काटने वाला कौन होता है?

राजा के सवाल का जवाब देते हुए एक विद्वान ने जवाब दिया, "राजन, सबसे तेज काटने वाला ततैया (Yellow Bee) होती है। जिसके काटने पर इंसान की चीख निकल जाती है। दूसरे विद्वान ने कहा महाराज मेरे अनुसार सबसे तेज काटने वाली मधुमक्खी होती है।  इसी प्रकार तीसरे ने कहा, मेरे नजरिए से तो बिच्छू सबसे तेज काटता है। तीसरे की बात सुनकर चौथे विद्वान ने कहा, महाराज, सांप का काटा तो पानी भी नहीं मांगता। इसलिए सांप ही सबसे तेज काटने वाला हुआ। 

 सभी विद्वानों के जवाब जानने के बाद भी राजा संतुष्ट नहीं था। इसलिए उन्होंने इसका जवाब अपने गुरु से जानने की इच्छा प्रकट की। उन्होंने सिंघासन पर विराजमान अपने गुरु से कहा, '' गुरुजी, मेरे इस सवाल का उत्तर आप ही दीजिए।''

राजगुरु कहने लगे राजन मेरी नजर में कोई भी जीव इतना जहरीला नहीं जितने जहरीले ये दो तरह के लोग होते हैं। पहले जो निंदक हैं और दूसरे जो चापलूस हैं। राजन ने हाथ जोड़ते हुए कहा प्रभु आप मुझे इस तथ्य को विस्तार से समझाएं। तो गुरुदेव कहने लगे, ''राजन एक निंदक व्यक्ति के दिल में निंदा-द्वेष रुपी हलाहल विष भरा रहता है। वह हर समय किसी न किसी की निंदा में आनंद महसूस करता है। वह अपनी निंदा के तीखे दांतों से ऐसा काटता है कि व्यक्ति बुरी तरह तिलमिला उठता है।

ठीक इसी प्रकार चाटुकार अपनी वाणी में मीठा विष भरकर किसी की ऐसी चटुकारता करता है कि व्यक्ति अपने दुर्गुणों को ही गुण समझने की भूल कर बैठता एवं अहंकार के नशे में चूर हो जाता है। चापलूस की वाणी व्यक्ति के विवेक का जड़मूल से नाश कर देती है। हमारे सामने गहराई से देखने पर ऐसे कितने ही उद्धरण आ जाएँगे जहां निंदकों एवं चापलूसों ने व्यक्ति को ऐसा काटा कि उनके अस्तित्व का ही समूल नाश कर दिया। हे राजन, इसलिए हरेक व्यक्ति को इन दोनों के दंश से सदा बच के रहना चाहिए। राजगुरु के इस जवाब से राजा सहित पूरी सभी संतुष्ट हो कर उनकी महिमा का जयघोष करने लगी।

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