Monday, February 4, 2019

महात्मा बुद्ध जी का उपदेश

महात्मा बुद्ध जी के संघ का विहार आजकल श्रावस्ती के जेतवन में था।  नित्यप्रति अनेकों ही श्रद्धालु जन उनके पास अपनी जिज्ञासायों के समाधान हेतु आते। एक दिन एक श्रद्धालु ने उसने सवाल किया-हे तथागत! इस संसार के सभी प्राणी चाहे वे जीव-जंतु हैं अथवा मानव, सभी में भूख पीड़ा, खुशी-गम, बीमारी आदि के भाव प्रकट करने की क्षमता है। सभी मुश्किल समय में अपना बचाव करना भी जानते हैं। पशु-पक्षी,जीव-जंतु एवं मानव सब का एक न एक दिन अंत होना भी निश्चित है। फिर भी सिर्फ मनुष्यों में ही ज्ञानी,चोर,डाकू,लुटेरे, आतंकवादी, वहशी,दरिंदे आदि जैसे बुरी प्रवृति के लोग क्यों होते हैं ? इसी तरह मनुष्यों में ही अलग-अलग धर्म,जातियां, ऊँच-नीच आदि जैसे क्षुद्र भाव होते हैं। जबकि बाकि योनियों में ऐसा बिलकुल भी नहीं होता। 

महात्मा बुध जी उस व्यक्ति का प्रश्न सुन कर मुस्करा पड़े एवं कहने लगे-वत्स! आप ने बहुत ही अच्छा सवाल किया है। वर्तमान समय में इस सवाल  का समझ में आना बहुत ही जरुरी है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि व्यक्ति के अंदर बुद्धि है। जिसके कारण वह बाकी सब योनियों से अलग और श्रेष्ठ है। दूसरा वह अपनी बुद्धि को अपने हिसाब से इस्तेमाल करने में स्वतन्त्र भी है। इसी इस्तेमाल के हिसाब से ही वह ज्ञानी,तपस्वी,बुद्धिजीवी और चोर,लुटेरा, आतंकवादी भी हो सकता है। 

जब मनुष्य अपनी बुद्धि का सार्थक प्रयोग नहीं करता, इसके द्वारा उत्थान की और नहीं बढ़ता तो वो अपने मार्ग से भटक जाता है। क्योंकि बुद्धि को सही तरह इस्तेमाल न करने से यह कुबुद्धि बन जाती है। और यह कुबुद्धि ही है जो मनुष्य को जाति-पाति,धर्म के अलग-अलग दायरों में कैद करके रख देती है। अापने सुना भी है कि ''खाली मन शैतान का घर'' तो वास्तव में यह कहावत बुद्धि के सही व गलत प्रयोग की ओर ही इंगित करती है। मानव बुद्धि के गलत प्रयोग के द्वारा विनाश को प्राप्त कर लेता है। और इसके सही प्रयोग से हर क्षेत्र में तरक्की एवं खुशहाली को प्राप्त करता है।  

परन्तु आज मानव ने अपनी अविवेक के कारण असंख्य विवादों को जन्म दिया है। अगर मानव चाहता तो वो अपनी बुद्धि का सही प्रयोग करके सारी मानव जाति को एकता के सूत्र में बांधकर इस मनुष्य तन को सार्थक कर सकता था। किन्तु उसने ऐसा नहीं किया।अभी भी देर नहीं हुई अगर मानव चेत जाये और अपनी बुद्धि को सदबुद्धि बनाकर प्रयोग करे तो अपने जीवन को सुखी-शांत करने के साथ ही मानवता का भी भला कर सकता है। 

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