Sunday, February 3, 2019

ख्वाब भी टूट गया




अपना एक ख्वाब ही तो था, लो वो भी टूट गया,
कुछ कंकर थे बस मुट्ठी में, कोई वो भी लूट गया, 

1. कुछ तिनके चुन, बुना था हमने भी एक घोंसला,
     लड़े थे सीधे तूफानों से, कुछ ऐसा था होंसला,
     खुद पे लिखा इतिहास मगर अब पीछे छूट गया।
    अपना एक...

2. छत पे पड़ी दरार महज़ लक़ीर मान ली थी
    तक़दीर बदल देंगे जग की, ज़िद्द ये ठान ली थी
    अमृत कलश हमारा लेकिन छूते ही सब फ़ूट गया।
   अपना एक...
 
3.  खैर ! ज़ख्म भी आदी हैं पीड़ा के, इन्हें रोने दो,
     दो चार पोटली पांच पंसेरी, जो भी हैं इन्हें ढोने दो,
     दिल चीज़ है टूटने वाली और ये टूट गया।
  अपना एक ख्वाब ही तो था, लो वो भी टूट गया
 कुछ कंकर थे बस मुट्ठी में, कोई वो भी लूट गया
 

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