Monday, February 25, 2019

Time is Treasure



                                     Importance of Time 

यूनान के एक मूर्तिकार ने एक कविता को पत्थर की मूर्ति में ढाला था। वह कविता थी-समय का स्वरुप कैसा है ? यह मानव-जगत के लिए प्रेरणास्रोत थी। जिसने यह मूर्ति बनाई, उसका नाम था "लिसिपस" यह विश्व प्रसिद्ध  मूर्तिकार सम्राट सिकंदर के समय में हुआ है। बेशक उसकी इस मूर्ति का कहीं भी अता-पता नहीं है परन्तु कैलिसस्ट्राटस नामक एक व्यक्ति ने उसका चित्र देखा था। उसने इसका वर्णन इस प्रकार किया है। वह चित्र एक सुंदर नौजवान का था। उसका रूप तो बस देखते ही बनता था। उसके सुंदर काले बाल माथे पर लहरा रहे थे। किन्तु पीछे से वह गंजा था। उसका माथा अनोखे तेज से चमक रहा था। उसके पैरों की उँगलियाँ और अंगूठे ही जमीन पर टिके हुए थे। वह इस प्रकार से खड़ा था मानो अभी उड़ने वाला हो। उसकी पीठ के पंख लगे हुए थे। किसी ने  पूछा कि यह कैसा चित्र है? उन्होंने बताया कि यह "समय" का चित्र है। जो सबको अपने वश में कर लेता है। लेकिन यह इस प्रकार से अंगुलिओं पर क्यों खड़ा है ?क्योंकि यह सदैव गतिशील रहता है। और इसकी पीठ पर यह पंख क्यों लगे हुए हैं? वह भी इसलिए , क्योंकि यह हमेशा उड़ने को तैयार रहता है। परन्तु इसके बाल माथे पर  क्यों लहरा रहे हैं ? वह इसलिए कि अगर कोई इसे पकड़ना चाहे तो इन बालों को पकड़ सकता है। फिर यह पीछे से गंजा क्यों है ? इसके पीछे साडी मानवता को समझाता एक बहुत बड़ा मर्म है। वह यह कि समय के एक बार उड़ने के पश्चात् कोई इसे पीछे से नहीं पकड़ सकता।

         ईश्वर ने मानव को इस धरती पर जन्म दिया। यह भी निश्चित है कि एक दिन मृत्यु का ग्रास बनना पड़ेगा। किन्तु इन दोनों के बीच जो है, वह है "समय" यह समय ठीक वैसा ही है, जैसा हमें उस चित्रकार ने मूर्ति  के माध्यम से बताया है। इस सृष्टि में सबको ही समय मिला है फिर चाहे वह अमीर है या गरीब, छोटा है या बड़ा किन्तु उसका सदुपयोग कितने लोग कर पाते हैं? कुछ तो समय के चक्र में घूमते हुए अपने भाग्य को कोसते रहते हैं। फिर उसके गुजर जाने के पश्चात् उसे पकड़ नहीं पाते, क्योंकि वह पीछे से गंजा जो है। परन्तु समझदार लोग समय की कदर करते हैं। वे उसको आगे से ही पकड़ लेते हैं। ऐसे लोग कहीं आसमान से नहीं गिरते, वरन इसी धरा पर रहने वाले हमीं में से एक होते हैं। Mother Theresa ने भी कहा है- “Yesterday is gone. Tomorrow has not yet come. We have only today. Let us begin.” इसलिए इस समय को संभालें जो हमारे हाथ में है। नहीं तो हमारे हाथ में पछतावा ही रह जायेगा।

Time is splitting in every second ...

कॉर्सिका टापू पर बंजारों के घर एक ऐसे ही शिशु का जन्म हुआ। उनके पास कोई भौतिक सम्पति नहीं थी। तम्बूओं में रहने वालों का यह बच्चा अपने जीवन में क्या कर सकता था? किन्तु आप जानकर हैरान होंगे कि यह बालक कोई और नहीं अपितू नेपोलियन था। जिसके पीछे-पीछे समय चलता था। उसके शब्दकोष में Impossible शब्द नहीं था। उसकी सफलता का एक ही रहस्य था कि उसने सदा समय का सदुपयोग किया। एक बार उसने एक जनरल को भोजन पर बुलाया परन्तु वह समय पर नहीं आया। समय होते ही नेपोलियन ने भोजन करना शुरू कर दिया। अभी वह भोजन करके उठा ही था कि जनरल भी गया। नेपोलियन ने कहा, "क्षमा कीजिए , भोजन का समय तो बीत गया " आइए कुछ काम बातें करते हैं।
         अब हमें थोड़ा विचार करना है कि हम अपने जीवन में सफल क्यों नहीं हो पाते ? क्योंकि हम punctual नहीं हैं। हम खुद को अपने मूड के हिसाब से चलाते हैं। हम अकसरां कहते हैं कि आज हमारा मन नहीं, यह काम कल करेंगे। हम देखें, ये सूर्य, चंद्र, पृथ्वी, ग्रह-नक्षत्र सभी नियमित पथ पर नियमित समय और गति से चलते हैं। सोचो अगर सूर्य कह दे कि आज मेरा मूड नहीं है। मैं कल उदय होऊँगा। फिर जरा सोचिए, क्या हमारा दिन चक्र नहीं रुक जाएगा ? अगर सारी trains, buses और aeroplane सही समय पर चलें तो क्या जन जीवन अस्त व्यस्त नहीं हो जाएगा? सही समय पर अपने गंतव्य पर पहुंचने के कारण हमें जीवन में बहुत भारी नुकसान भी उठाने पड़ सकते हैं। हम जो पल बर्बाद  कर देते हैं वे हमारी बदकिस्मती की तिजोरी में जमा हो जाते हैं। इसलिए समझदार व्यक्ति वही है जो समय की कीमत को जनता है। एक बार एक व्यक्ति को कुत्ते ने काट लिया। वह doctor के पास गया। उसने जाकर दरवाजा knock किया। अंदर से आवाज़ आई, "कौन है?" बाहर से व्यक्ति बोला, "doctor साहब! मुझे कुत्ते ने काट लिया है। जल्दी दरवाजा खोलें।" डॉक्टर अंदर से बोला, क्या ततुम्हें पता नहीं कि मैं 9 बजे के बाद इलाज नहीं करता।" व्यक्ति बोला, "हाँ, डॉक्टर साहब मुझे तो पता है किन्तु उस कुत्ते को नहीं पता और उसे समझाता भी कौन? क्योंकि वह तो एक जानवर है।"

        अगर हम भी समय के साथ कंधा मिलाकर चलते हैं, तो हम भी उन महान हस्तियों में गिने जा सकते हैं, जिन्होंने आसमान की ऊँचाइयों को छुआ और समुद्र तल की गहराईओं को मापा था। समय और समुद्र की लहरें किसी का इंतज़ार नहीं करती। समय तो अमूल्य वास्तु है। एक बार किसी ने आदि शंकराचार्य जी से पूछा कि जीवन में सबसे बड़ी हानि क्या है? उन्होंने ने कहा कि समय को व्यर्थ खोना जीवन की सबसे बड़ी हानि है। सब तरह की हानियों को पूरा किया जा सकता है परन्तु नष्ट हुआ समय दुबारा नहीं आता। जैसे समय लगाकर धन तो कमाया जा सकता है पर धन लगाकर भी समय नहीं खरीदा जा सकता। समय लगाकर विद्या तो अर्जित की जा सकती है पर विद्या से समय का एक क्षण भी अर्जित नहीं किया जा सकता। समय पाकर एक व्यक्ति से अनेकों व्यक्ति हो जाते हैं भाव पूरा परिवार बन जाता है पर पूरा परिवार मिलकर भी एक व्यक्ति की आयु नहीं बढ़ा सकते। समय खर्च करके विश्व प्रसिद्धि तो मिल जाती है पर उस प्रसिद्धि से जीवन नहीं मिलता। इसलिए महान सिकंदर को अपने जीवन की अंतिम घड़ियों में यह बात कहनी पड़ी कि आज मेरे पास दुनिया की हर दौलत है पर फिर भी मैं अपने लिए एक स्वास भी नहीं खरीद सकता। अंत में यही शिक्षा मिलती है कि हमें समय रहते ही इसकी कदर करनी चाहिए और इसे भूलकर भी व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए।

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