Saturday, March 2, 2019

शिवरात्रि सी रात🌑कहाँ है

  


 दिवस चमकता 🌄लाख भले पर, शिवरात्रि सी रात🌑कहाँ है,
   और देव 🙏भी कम नहीं वैसे, पर भोले🕉सी बात कहाँ है।

1. छत विहीन नहीं कोई आभूषण,भूत प्रेतहैं जिनके प्रिय गण।
    बैठन को इक सिला ठोस है,न रत्ती भर अफसोस😞है।
    गज़ब रज़ा और मज़ा ही मज़ा, तेरी कुटी के चावल🍚भात कहाँ है।
    पर भोले सी...

2. तन पे भस्म और मस्ती झमाझम, मरघट स्वामी किन्चित न गम।
    सिमरन📿का भरते दम, हर दम, प्रसन्न😊शीघ्र हों और रूठना कम।
    सीस पे बहती अमृत गंगा,  वैसी और बरसात⛈कहाँ है।
    पर भोले सी...

3. तांडव हो 🔥जब जटा फैला के, और वीरभद्र को सहला के।
    गर्जन💥 सृजन हो तब खुल के, महक🌹🌸उठें तेरे स्नेह में धुल के।
    तुमरे ही दम💗 भरते हम दम, वरना अपनी जात कहाँ है।🚩
   
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🎪🕉☠🕉🚩🕉🐂🕉👁‍🕉🐍🕉🙏🕉🚩🕉☠🕉
    

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