Thursday, March 7, 2019

मैं ममता🤱छाँव बिखेरती




    मैं दुर्गा ⚔भक्त स्वामिनी, नहीं कामदेव की कामिनी💃
    मैं दर्शन हूँ👀प्रदर्शन नहीं, हूँ प्रभु कंठ की रागिनी🎶।

1. मैं ममता🤱छाँव बिखेरती, और स्नेह की बहती🌹🍃मीठी पवन,
    मेरी गोद है बैकुंठ🎇की गलियाँ, और देव-मुनि✋का भव्य शयन,
    मैं वंदनीय🙏,मैं पूजनीय, मैं लक्ष्मी👣धन-धान्य की धनी
    मैं दुर्गा भक्त...

2. मैं जननी राघव 🏹कान्हा की, और अंगद हनुमंत🐵 लाल मेरे,
    जहाँ कदम पड़े वहीं सूर्योदय🌅, और अग्नि लपटें🔥भाल मेरे,
    जो छू ले भस्म हो क्षण भर में, मैं नभ में चमकती⚡दामिनी।
    मैं दुर्गा भक्त...

3. पर वर्तमान धुंधला🌑सा क्यूँ , क्यूँ प्रश्न❓खड़े अस्तित्व पे हैं,
    अति पावन🌊सीता होकर भी, कुछ दाग⚫लगे सतीत्व पे हैं,
    तू नारी अति भारी है अडिग, पर क्यूँ सूखी टहनी🍂सी बनी।

   मैं दुर्गा ⚔भक्त स्वामिनी, नहीं कामदेव की कामिनी💃
   मैं दर्शन हूँ👀प्रदर्शन न, हूँ प्रभु कंठ की रागिनी🎶।

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