Tuesday, April 23, 2019

हे रघुराज🏹, धरा🌏 के ताज



हे रघुराज🏹, धरा🌏 के ताज,
मेरे सरताज, व्याकुल😢 जन जन है।
आपदा💥भारी, त्रस्त नर नारी👪
वसुंधरा हारी, हारा गो-धन 🐂है ।

हर और अवध🌞 का वध
पीड़ाओं से लद, सरयू मरु सी है ।
हनुमंत वीर🐵अब न है धीर,
जनकसुता भी डरी-डरी💓💓 सी है।
सब लुट 💛जाए, दम घुट💨 जाए,
हर और ये कैसी घुटन सी है।

सागर का तट, जिसकी थी रट,
ना दूंगा पथ, वो लेकिन झुक गया।
हर घट की रट, सिंधु💨💨 सी हठ,
सब घट भये सठ, वेग भी रुक गया।
फिर धनुषबाण, करो ना संधान,
जगे मानवता, जो रुनझुन सी है।

घनें 🌴🌳🌲वन डराते, पथ छुपाते छल भर,
मारीच👹 सुबाहु चहुँ दिशा, महिं पग धरे।
ऋषि विश्वामित्र संग, सब ही कर दो भंग,
पराक्रम हो💪 यूँ के, दुनिया हो जाए दंग😳।
श्री राम👣सर्वत्र हों, पत्र-पत्र हों,
बिन राम 🏹ना कोई, ये धुन सी है।

हे रघुराज🏹, धरा🌏 के ताज
मेरे सरताज, व्याकुल😢 जन जन है ।
आपदा💥भारी, त्रस्त नर नारी👪
वसुंधरा हारी, हारा गो-धन 🐂है ।


🎪🚩🏹🚩जय श्री राम 🚩🏹🚩🎪

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