Friday, May 24, 2019

किसी की चिकनी चुपड़ी बातों में न आएँ



हम सब इस बात को भलीभांति जानते हैं कि एक जंगल में बहुत सारे जानवर रहते हैं। उनमें एक भेड़िया भी था। भेड़िया एक बहुत ही चतुर जानवर है जिसे दूसरे जानवरों को ठगने और मूर्ख बनाने में बहुत मजा आता है। एक दिन वह भेड़िया सारा दिन जंगल की खाक छानता रहा लेकिन उसके हाथ कोई शिकार लगा। भेड़िया का पेट भूख के मरे चिपका जा रहा था। आंतड़ियाँ मुँह को रही थीं। थक हार कर भेड़िया एक बड़ी चट्टान पर बैठ गया। उसे कहीं से भी अपना पेट भरने का जुगाड़ नजर नहीं रहा था। अचानक उसकी दृष्टि एक बकरी पर पड़ी। जो एक ऊँचे पहाड़ पर चर रही थी। भेड़िया सोचने लगा भूख के मरे तो पहले ही पेट की आंतें बाहर रही है। मैं तो एक पैर चलने की हालत में नहीं हूँ। फिर कैसे इस बकरी को अपना शिकार बनाऊं? उस भेड़िए ने काफी तिकड़म लगाने के बाद सोचा कि बकरी को ही अपने पास बुलाते हैं। अगर मूरख बकरी का ही शिकार कर पाए तो फिर हम भेड़िया भी किस काम के? खैर! भेड़िया ने मीठे आवाज़ में बकरी को आवाज़ लगाई -बकरी बहन, बकरी बहन !सुनो ऊपर मत जाओ, ऊपर शेर है अगर तुम ऊपर गयी तो वह तुम्हारा शिकार कर लेगा। लेकिन बकरी ने भेड़िया की किसी बात की और कान किया। भेड़िया को लगा शायद बकरी दूर है इसलिए उसे मेरी आवाज़ सुनाई नहीं दे रही है। 
उसने फिर से पूरा जोर लगाकर बकरी को आवाज़ दी। बकरी बहन, बकरी बहन जी !ऊपर मत जाना वहां शेर महाराज है आपको मार देंगे। लेकिन बकरी की और से कोई जवाब नहीं आया। अब उस भेड़िये ने सोचा लगता है बकरी बहन तक मेरी आवाज़ पहुंच नहीं रही है इसलिए ही वह कोई जवाब नहीं दे रही है। उस भेड़िये ने किसी किसी तरह अपनी सारी शक्ति को समेटा और उठने की कोशिश करने लगा। लेकिन उसकी टाँगे उसका साथ देने से इंकार कर रही थी। उसने थोड़ी देर रुक कर किसी   किसी तरह अपनी बची खुची ऊर्जा को समेटा और उठने के लिए पूरा जोर लगा दिया। खैर! उस भेड़िये के आत्मबल ने उसका साथ दिया और वह उठने में कामयाब हो गया। वह गिरता पड़ता किसी तरह बकरी के पास पहुंचा और कहने लगा -बकरी बहन, बकरी बहन मैं कब से आपको आवाज़ें दे रहा हूँ? आप इस पहाड़ के ऊपर जाएँ कुछ देर पहले ही मैंने उधर शेर महाराज को जाते देखा है। अगर आप ऊपर गई तो आपके प्राण भी जा सकते हैं। इसलिए आप मेरे साथ वापिस जाओ। मेरी भी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही आपके साथ से मैं भी आसानी से उस चट्टान तक पहुँच जायूँगा।
लेकिन बकरी ने भेड़िए की बात की और कोई ध्यान नहीं दिया और घास चरती रही। भेड़िये ने सोचा शायद भूख के कारण मेरी आवाज़ कम निकल रही है और बकरी को सुनाई नहीं दे रही है। और इसलिए यह कोई जवाब नहीं दे रही है। इसलिए वह भेड़िया बकरी के बिलकुल पास आकर कहने लगा बहन आप ऊपर जाओ। मैंने शेर महाराज  को ऊपर की और जाते देखा है। लेकिन बकरी ने उसकी किसी बात का जवाब देना तो दूर की बात है उसकी और सर उठाकर देखा तक नहीं। भेड़िये ने आखरी दांव खेलते हुए बकरी को कहा बहन ऊपर जाओ शेर खा जाएगा। इस बार बकरी ने उस भेड़िये को मुँह तोड़ जवाब देते हुए कहा-तुम्हें मेरे खाने की चिंता हो रही है या फिर अपने खाने की। मैं अपनी रक्षा खुद कर लूंगी तुम अभी के अभी यहाँ से नौ दो ग्यारह हो जाओ। बकरी का करारा जवाब सुन कर भेड़िया अपना सा मुँह लेकर चलता बना। उसे समझ चुका था कि यहाँ मेरी दाल गलने वाली नहीं है। इसलिए हमारे बड़े बूढ़े हमे सुचेत करते हैं कि हमे कभी भी किसी की चिकनी चुपड़ी बातों में नहीं आना चाहिए। हो सकता है वह भी उस भेड़िये की तरह आपका शिकार ही करना चाहते हों। आपकी भावनाओं को लूटना चाहते हो। इसलिए सदैव जागरूक रहें। 

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